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'बाबा मेरे बाबा'

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पंद्रह मई का दिन था, मेरी ऑनलाइन कक्षा चल रही थी । अचानक मुझे महसूस हुआ कि माँ किसी से फोन पर बात कर रही थी, वह बहुत परेशान लग रही थी। मैने उनसे जाकर पूछा तो उन्होंने कुछ नही बताया। कुछ देर तक मैं भी अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गई, पर ना जाने क्यों मेरा दिल घबराने लगा। आज पापा  जल्दी आ  गए, क्यों? मैं तुरंत वापिस बाहर गई तब पता चला कि मेरे 'बाबा' नहीं रहे है। मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। 'बाबा मेरे बाबा'  जिनकी आवाज मे मधुरता और बातो में धैर्यता झलकती थी।उनकी प्यारी- सी मुस्कान सबके मन को लुभाती थी। उन्होंने अपने जीवन मे आई सभी चुनौतियों का सामना डटकर किया, कभी हार न मानी । मेरे बाबा हमेशा मुझे सिखाते थे कि हमें धैर्य रखना चाहिये । हमें  दूसरो का सम्मान करना चाहिये। उनकी एक-एक बात मुझे उनकी याद दिलाती है I  उन्होंने हमेशा मुझे सही राह दिखाई। मैं बहुत खुशकिस्मत हूँ कि मेरे बाबा दुनिया के सबसे अच्छे व्यक्ति है।  मैं हमेशा सोचती थी कि मै जब बड़ी हो जाऊँगी तब  बाबा  के साथ वर्ल्ड टूर पर जाऊँगी, पर बाबा तो मुझे छोड़ कर चले गए। मुझे याद है जब मैने पहली बार...

रक्षाबन्धन

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  भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन ( राखी ) का त्योहार श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई - बहन के स्नेह का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है , जिसे राखी कहते हैं।   इस दिन बहनें भगवान से अपने भाईयों की लंबी उम्र की और उनके अच्छे भविष्य की दुआ करती है और भाई भी उनकी रक्षा का वचन देते हैं।भाई - बहन एक दूसरे को उपहार देते है।   इस दिन बहनें भगवान से अपने भाईयों की लंबी उम्र की और उनके अच्छे भविष्य की दुआ करती है और भाई भी उनकी रक्षा का वचन देते हैं। भाई - बहन एक दूसरे को उपहार देते है।   राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह हमें नहीं पता , हिन्दुओं पुराणों के अनुसार कई कथाएँ है। कृष्ण और द्रौपदी की कहानी लोकप्रिय है , जिसमे युद्ध के दौरान श्री कृष्ण की उंगली घायल हो गई थी , श्री कृष्ण की घायल उंगली को द्रौपदी ने अपनी साड़ी मे से एक...

लालची कुत्ता

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There are few tales which are very popular till today. Even in our childhood, we enjoyed listening to them from our parents and teachers because they always taught valuable lessons. The greedy dog taught us all about greed and how it causes pain, the rabbit and a tortoise taught us that it is okay to be slow and steady, the fox and the grapes showcased that nothing can be achieved without hard work and so much more. Last week, year 5 students watched the Greedy Dog during their Hindi class and presented the story in a beautiful way which is indeed remarkable. Please watch and share:-

भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अतुल्य उदाहरण

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  पक्षियों का राजा और सबसे सुंदर पक्षी मोर, जिसको  संस्कृत में 'मयूर' भी कहते है। यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। जिसे भारत सरकार ने 26 जनवरी,1963 को राष्ट्रीय पक्षी भी घोषित किया गया ।    भारत सरकार ने 1972 से इसके शिकार पर रोक लगा दी अब अगर कोई शिकार करता है तो उसको कठोर सजा दी  जाएगी । मोर  ज्यादातर भारत, श्रीलंका और बर्मा में पाए जाते हैं।  यह म्यांमार का भी राष्ट्रीय पक्षी है। मोरों की तीन प्रमुख प्रजातियाँ हैं, जिनमें से दो एशियाई मूल की है,नीला भारतीय मोर (Blue Indian peacock) और हरा मोर (Green peacock) एशियन प्रजाति है । कांगो मोर (African Congo Peacock) अफ्रीकी प्रजाति के है । मोर का शरीर नीले रंग को होता है। मोर के पंख रंग बिरंगे होते हैं। मोर की पूँछ लम्बी, मोटी और भारी होती है और गर्दन सुराही की तरह पतली और लंबी होती है। मोर के सिर पर सुंदर कलगी होती है। । मोर की आँखों के ऊपर और नीचे सफेद रंग के धब्बे होते हैं । कहते हैं कि मोर का वजन 5 से 10 किलो तक होता है। मोर मुख्यतः जमीन पर रहने वाले पक्षी हैं. मोर वजन ज्यादा होने के कारण ये ज्यादा उड़ न...

ताज महल

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ताज महल को असीम प्रेम का प्रतीक कहा गया है । मुगल शिल्पकार उस्ताद अहमद लाहौरी के अधीन 22000 कारीगरों ने 20 साल की कड़ी मेहनत के बाद इस स्मारक को तैयार किया गया। माना गया है कि इसके निर्माण में 320 लाख रूपए की लागत आई   थी। मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी तीसरी बेगम मुमताज की याद में इस मकबरे को बनवाया था। मकबरे के बीचों - बीच बेगम मुमताज की कब्र बनवाई गई है। यह भी माना जाता है कि शाहजहाँ स्वंय के लिए ऐसी ही काले रंग की कब्र का निर्माण कराना चाहता था परंतु उनके बेटे औरगंजेब ने उन्हें आगरे के किले में बंदी बना लिया था   । उनकी मृत्यु के बाद उन्हें ताजमहल में ही   मुमताज के बराबर में दफन कर दिया गया। ताज महल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ था और 1653 तक चला था। कहते है कि शाहजहाँ ने ताज महल के निर्माण के बाद कुशल शिल्पकारियों के हाथ कटवा दिया थे जिससे दुबारा ऐसी खूबसूरत इमारत कोई बना ना पाये , लेकिन इस बात कोई सबूत नहीं ...